हार्ट अटैक और होम्योपैथिक दवाएं
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हार्ट अटैक रोगियों को भविष्य में दिल के दौरा का खतरा न रहे इसके लिए कौन–कौन सी होम्योपैथिक दवाएं दी जाती हैं, पांच नाम बताएं?
- एकोनिटम नेपेलस: यह एक होम्योपैथी दवा है जो दिल का दौरा पड़ने पर तुरंत दी जाती है। रोगी को बाएं हाथ में सुनपन महसूस हो सकता है
- कैक्टस ग्रैंडिफ्लोरस: यह दवा तब मदद करती है जब हिंसक और तीव्र क्रिया के साथ माइट्रल अपर्याप्तता के साथ एंडोकार्टिटिस होता है। धमनीकाठिन्य के कारण धमनियां और हृदय कमजोर होते हैं। यह एनजाइना पेक्टोरिस में बहुत अच्छा काम करती है
- क्रैटेगस ऑक्सीकैंथा : हृदय की मांसपेशियों पर कार्य करती है और यह हृदय टॉनिक भी है। मायोकार्डिटिस, हृदय की अनियमितता, धमनीकाठिन्य और कार्डियक ड्रॉप्सी के मामलों में मदद करती है। अगर मरीज़ हृदय में और बाएं हंसली के नीचे दर्द बताता है तो इस दवा को दिया जा सकता है
- ऑरम मेटालिकम : रोगी को ऐसा महसूस होता है जैसे दो या तीन सेकंड के लिए दिल की धड़कन बंद हो गयी हो। मरीज को छाती में दर्द होता है जो आमतौर पर रात में बढ़ जाता है। यह मायोकार्डियल कमजोरी और उच्च रक्तचाप का इलाज करती है
- डिजिटलिस पुरपुरिया: अगर मरीज की नाड़ी कमजोर या अनियमित, रुक रुक कर, असामान्य रूप से धीमी या तेज होती है तो मरीज़ को इस दवाई से काफी आराम मिलता है। मरीज़ को ऐसा महसूस होता है जैसे उसके हिलने डुलने पर दिल की धड़कन बंद हो जाएगी और वह अपनी सांसो को रोके रखने के बारे में सोचता है
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होम्योपैथिक दवाएं कैसे कम करती है हार्ट अटैक का खतरा और इसमें कितना वक्त लगता है?
होम्योपैथी दवा की एक प्रणाली है जो रोगी के लक्षणों के अनुसार काम करती है। रोगी के विशिष्ट लक्षणों के आधार पर दवाओं का चयन या निर्धारण किया जाता है। ये दवाएं रोग के प्रति रोगी की रोग प्रतिरोधक क्षमता/जीवन शक्ति को बढ़ाती हैं। होम्योपैथी रोगी को ऐक मानती है और रोग का उसके मूल कारण से उपचार करती है। तो, होम्योपैथी दवाएं न केवल दिल के दौरे में मदद करती हैं बल्कि उच्च रक्तचाप, उच्च कोलेस्ट्रॉल और मधुमेह जैसे जोखिम वाले कारकों के इलाज में भी मदद करती हैं।
होम्योपैथी में दिल के दौरे के इलाज की अवधि पूरी तरह से रोग की गंभीरता पर निर्भर करती है।
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क्या होम्योपैथिक दवाएं दिल के दौरे की परेशानी को जड़ से खत्म कर सकती हैं और दिल को दुरुस्त रख सकती हैं?
हां, हार्ट अटैक के कई मामलों में होम्योपैथी उत्कृष्ट काम करती है लेकिन यह पूरी तरह से मरीज़ की तकलीफ पर निर्भर करता है. मरीज़ की तकलीफ का मतलब है कि यदि रोगी रोग के शुरू में ही होम्योपैथी दवाएं लेना शुरू कर देता है जैसे कि उसे उच्च रक्तचाप या चिंता के लिए तो वह दिल के दौरे को रोक सकता है। यदि हृदय रोग ज़्यादा गंभीर नही है तो होम्योपैथी दवाए काफी मददगार होती है। होम्योपैथी हार्ट अटैक के बाद के मामलों को प्रबंधित करने में मदद करती है। होम्योपैथी में कई हृदय टॉनिक हैं जो रोगी के हृदय को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।
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होम्योपैथिक दवाओं की डोज क्या हो सकती है?
होम्योपैथिक दवाओं की डोज रोगी के रोग पर निर्भर करती है। यदि व्यक्ति का रोग गंभीर स्थिति में है तो उसके लिए अलग प्रकार की होम्योपैथिक दवा की खुराक दी जाती है। होम्योपैथिक दवा की खुराक हर मरीज़ के लिए अलग-अलग होती है। इसलिए किसी भी होम्योपैथिक दवा को शुरू करने से पहले रोगी को एक योग्य होम्योपैथिक चिकित्सक से परामर्श लेने की आवश्यकता होती है।
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क्या इनके कोई साइड–इफेक्ट भी हैं?
नहीं, होम्योपैथिक दवाओं का कोई भी साइड इफेक्ट नहीं होता पर कभी-कभी दवाई से उत्तेजना हो जाती है परंतु यह मरीज़ को बिल्कल नुकसान नही करती। यह दवाई का प्रोसैस होता है जो कुछ टाइम मै ठीक भी हो जाता है। होम्योपैथिक दवाएं हमेशा एक योग्य होम्योपैथिक चिकित्सक के परामर्श के अनुसार ही लेना चाहिए, जिससे आपको यह मालूम हो की यह दवा किस प्रकार से लिया जाए।एक योग्य होम्योपैथिक चिकित्सक रोगी के बीमारी की स्थिति के अनुसार ही उसको दवा देता है और बीमारी में सुधार के अनुसार ही दवाओं के डोज को भी बदलता रहता है।